13 Life Changing Goal Setting Rules In Hindi- 13 जिंदगी बदल देने वाले लक्ष्य निर्धारण के नियम

Hello Dosto,

आज आपके सामने पेश कर रहा हूँ Goal Setting Rules In Hindi- यानी की लक्ष्य निर्धारण के नियम ! ये HOW TO ACHIEVE YOUR GOALS EASILY IN HINDI : अपने लक्ष्यों को कैसे सरलता से प्राप्त करे पोस्ट का दूसरा भाग है अगर आपने अभी तक ये लेख नही पढ़ा है तो पहले इस लिंक पर क्लिक करके "पहले भाग" को पढ़ सकते है ! 


13 Life Changing Goal Setting Rules In Hindi
13 Life Changing Goal Setting Rules


13 Life Changing Goal Setting Rules In Hindi- 13 लक्ष्य निर्धारण के नियम 


लक्ष्य निर्धारण के नियम वैसे तो सभी के जीवन की परिस्थितियों और पसंद-नापसंद भिन्न होती है और उसी हिसाब से उनके जीवन लक्ष्य भी जुदा जुदा होते हैं किंतु फिर भी कुछ ऐसे सामान्य नियमों की बात की जा सकती है जो हर एक को अपने जीवन लक्ष्य तय करने हेतु सही दिशा निर्देश उपलब्ध करा सके! आपके सामने कुछ ऐसे ही Points रख रहा हूं !
पढ़िए और अपनी परिस्थितियों के हिसाब से उन पर अमल कीजिए !

1. अपने मूल्यों और संस्कारों को देखिए:  आपके लिए वास्तव में महत्वपूर्ण क्या है आपका व्यवसाय आपका परिवार धर्म या मजहब सुख-सुविधाएं आप के शोक क्या है जो जिंदगी में आपके लिए सबसे ज्यादा मायने रखता है जिसके लिए आप बाकी सब कुछ छोड़ सकते हैं ! आपके जीवन की पहली दूसरी और तीसरी प्राथमिकताएं क्या है ? प्रेरणा कह लीजिए, प्राथमिकता कह लीजिए या फिर जीवन-मूल्य कह लीजिए ! ये वो चीजे होती है जो आपकी निर्णय प्रक्रिया को सबसे अधिक प्रभावित करती है इन्हीं के आधार पर हम चीजों को सही या गलत में बांट कर देखते हैं !

इन्हीं के चलते हमें जीवन में पूर्णता का एहसास होता है अतः इनके बारे में हमारा दृष्टिकोण बिल्कुल साफ होना चाहिए ! और  इन्हीं को ध्यान में रखकर हमें अपने लिए लक्ष्य निर्धारण करना चाहिए !

हो सकता है कि एक से अधिक चीजें आप को Motivate करती हो ! इन्हें आप चाहे तो अपने जीवन मूल्य कह ले, या फिर Driving Forces. उन्हें खोजिए और ऐसे जीवन लक्ष्य तय कीजिए जो न सिर्फ मूल्यों पर आधारित हो, बल्कि उनकी अभीवृद्धि में भी सहायक हो सके ! आखिर को यही वह चीजें हैं जो आपको खुशी देती है |

2. पता हो कि कहां पहुंचना है:  IBM company के Founder watson  से एक बार किसी ने पूछ लिया की IBM की असाधारण सफलता का श्रेय किसे देना चाहेंगे ? जवाब में उन्होंने कहा कि इसके पीछे तीन चीजें हैं ; पहली चीज तो यह की शुरूआत से ही इनके दिमाग में बिल्कुल स्पष्ट था कि उन्हें किस तरह की कंपनी बनानी है, अर्थात आज कंपनी का जो स्वरूप है इसकी कल्पना उन्होंने कंपनी शुरू करने से पहले कर ली थी !दूसरी चीज की कंपनी के स्वरुप की कल्पना करने के बाद उन्होंने स्वयं से पूछा था कि इस तरह की कंपनी के कामकाज का तरीका कैसे होगा ? मसलन किस तरह के दफ्तर होंगे ? किस तरह के कर्मचारी काम करेंगे ? वर्क शेड्यूल कैसे होगा ? वगैरह... वगैरह... और तीसरी चीज यह है कि यह सब जो उन्होंने सोचा था पहले ही दिन से उसे अमल में लाना शुरू कर दिया था !

3. भविष्य को वर्तमान में जिए: जो हम सोचते हैं वही हम हो जाते हैं गौतम बुद्ध ने कहा था तो क्यों न अपने विचारों की इस विलक्षणता को अपने पक्ष में इस्तेमाल किया जाए लगातार उस स्थिति की कल्पना करें जिसमें आज से 20 साल बाद अपने आप को देखना चाहेंगे |

ज्यादातर समय दिमाग पर हावी रखने वाले विचार ही हमारी वास्तविकता बन जाते हैं वही हमारे जीवन की परिस्थितियों तय करने लगते हैं इसलिए मैं लक्ष्य निर्धारण की बात पर इतना जोर दे रहा हूं ! लक्ष्य निर्धारण के माध्यम से वास्तव  में हम एक विशेष तरह के विचारों को अपने दिमाग में बैठाने का प्रयास करते हैं ताकि हमारा जीवन उनके विचारों को हमारी वास्तविकता बना दें लक्ष्यों के रूप में दिमाग में बैठाए गए विचार ये चीजें होती है, जिन्हें हम अपने लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण मानते हैं दूसरे शब्दों में कहें तो अपने लक्ष्यों को हासिल करने का सबसे आसान तरीका है इस बात की कल्पना करना कि हम उन लक्ष्यों को पा चुके हैं !

अतः अपने मन वचन और कर्म से ऐसा जाहिर होने दीजिए  मानो Desired Success Earn कर चुके हैं उसके बाद का काम आपका Subconscious (अवचेतन) खुद-ब-खुद कर देगा |


importance of goal setting in hindi
Image Source : changeworkscom

4. आने वाले साल की प्राथमिकताओं को लिख ले : अपने लिए महत्वपूर्ण चीजों को कागज पर लिस्ट बना लेने से क्या होता है ? असल में लिखते समय जो अक्षर कागज पर उभरते है ! वे साथ साथ हमारे मस्तिष्क मैं भी अंकित होते जाते हैं मानसिक बीमारी के रूप में और मानव मस्तिष्क की यह प्रवृत्ति है की जो भी है उस में डाल दिया जाता है विचार, स्वपन, मानसिक चित्र वह उन्हें साकार करने में जुट जाता है अतः यदि आप 10 चीजों की सूची बनाते हैं तो पूरी संभावना है कि उनमें से सात,आठ चीजें तो आने वाले साल में सच हो ही जाएंगे |


5. अपने सपनों का चार्ट बनाएं:  एक कोरा कागज लीजिए और उसे अपने घर या दफ्तर की दीवार पर किसी ऐसी जगह चिपका दीजिए जहां बार-बार आपकी नजर पड़ती हो ! अब आपको करना यह है कि अखबारों पत्रिकाओं के पन्ने पलटते हुए जब भी आपको किसी ऐसी चीज की तस्वीर नजर आ जाए, जिसे आप आना चाहते हो तो उस तस्वीर को काटकर इस खाली कागज पर चिपका दीजिए इस तरह आपका ड्रीम चार्ट तैयार हो जाएगा !


 अब जितनी बार भी आप इस ड्रीम चार्ट को देखेंगे उतनी ही बार आपके सपनों या चाहतों का इंप्रेशन आपके मस्तिष्क पर पड़ेगा ! और जल्द ही वह इंप्रेशन आपकी विचार प्रक्रिया तथा अवचेतन का हिस्सा बन जाएंगे इस तकलीफ को मैंने अपनी कार्यशालाओं के दौरान सैंकड़ों छात्रों पर आजमा कर देखा है और इसलिए मैं कह सकता हूं कि यह एक बेहद कारगर तरीका है | (Words BY Pritam Goswami)

6.  तीन चीजें जो आप हर हाल में हासिल करना चाहेंगे :  सैंकड़ों  लक्ष्य ऐसे हो सकते हैं जिन्हें आप आना चाहते हो ! इच्छाओं का वैसे भी कोई अंत नहीं है और लोगों ने हासिल की भी है ! ढेरों - ढेरों उपलब्धियां एक ही जीवन में आप भी कर सकते हैं मुझे इस बात में कोई शक नहीं है लेकिन यह जीवन इतना बड़ा भी नहीं है और निश्चित भी नहीं ! अतः अपनी तमाम इच्छा हो या सपनों को सर्वाधिक महत्वपूर्ण से कम महत्वपूर्ण के क्रम में जमा कर देखना समझदारी होगी  ! इस तरह जो सबसे जरूरी चीजें होगी उनके लिए समय रहते प्रयास किए जा सकेंगे !

अतः पहले तीन ऐसी इच्छाए सोचिए जिन्हें आप मरने से पहले हर हाल में पूरी करना चाहेंगे ? इसके बाद तीन इच्छाएं जिन्हें अगले 20 सालों में पूरी होते देखना चाहेंगे, फिर 10 साल में पूरी होने वाली, फिर 5 साल में, फिर इसी साल, फिर इसी महीने, इसी हफ्ते और अंततः वित्तीय सर्वाधिक महत्वपूर्ण इच्छाए सोचिए ! जिन्हें आप अभी के अभी पूरा करना चाहते हो |

एक लड़की थी जो बचपन से ही अंतरिक्ष और तारों को लेकर Overwhelmed (अभिभूत) थी और हमेशा उन्ही की बातें किया करती थी उसने हमेशा से एक ही सपना देखा था दूर आसमान में जाने का !  वह कुछ ऐसा काम सुनना चाहती थी जिससे सितारों की यह दुनिया उसके लिए अपने दरवाजे खोल दें ! उसकी यह ख्वाहिश इन लोगों को बच्चों की  फतासीयां लगती थीऔर क्यों न हो एक छोटे से कस्बे के एक साधारण से मध्यम वर्गीय परिवार में पहले वाली लड़की के पास ऐसी आसमानी ख्वाबों को पूरा करने  का अवसर भला कैसे आ सकता था लेकिन वह लड़की सिर्फ सपनों की ही नहीं इरादों और समर्पण की भी पक्की थी उसके पास में सिर्फ एक सपना था ! बल्कि उस सपने तक ले जाने वाला मार्ग भी उसने खोज लिया था ! ठीक-ठाक कार्य योजना भी बना ली थी उस साल वह एकलौती लड़की थी जिसने पंजाब विश्वविद्यालय के "Aeronautics Engineering" Faculty में Admission लिया था उस लड़की ने अपने सपनों पर विश्वास बनाए रखा और अंततः NASA (अमेरिकी अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान) पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला होने का गौरव हासिल किया उस लड़की का नाम है कल्पना चावला |

तो दोस्तों अगर हमारे भीतर किसी लक्ष्य को पाने की तीव्र लालसा है, जबरदस्त बेकरारी है, अगर उस बेकरारी को पूरा करने के लिए हमने सही कार्य योजना बनाई है, और उस कार्य योजना को मासिक साप्ताहिक तथा दैनिक लक्ष्यों के रूप में विभक्त कर रखा है तो दुनिया की कोई ताकत आपको आपकी मकसद में कामयाब होने से नहीं रोक सकती |
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7. खुद से सवाल पूछो:  अपने लक्ष्य सपनों के बारे में सोचते हुए सिर्फ उनको पूरा होते देखना ही पर्याप्त नहीं है इससे एक कदम आगे बढ़िए !और स्वयं से पूछिए कि यह कैसे हासिल होगा ? और मुझे इसे हासिल करने के लिए क्या क्या करना होगा ? इन सवालों को अपने Subconscious mind में उतर जाने दीजिए, और इंतजार कीजिए ! अपने प्रश्न के उत्तर का उत्तर आएंगे ! और Universal Mind से आएंगे जो सब कुछ जानता है इतिहास गवाह है की तमाम बड़ी खोजें इसी तरीके से हुई है अतः लगातार सवाल करने को अपनी आदत बना लीजिए ताकि आपको हरदम बताता रहे कि आगे क्या करना है |

8. एक बार में एक ही लक्ष्य:  लक्ष्य निर्धारण में जो सबसे बड़ी गलती होती है, वह है एक साथ कई सारे लक्ष्य खड़े कर लेना ! और अधिकांश लोग यह गलती करते हैं, इससे आपकी ऊर्जा बिखर जाती है. बंट बन जाती है और किसी भी लक्ष्य को पर्याप्त शक्ति हासिल नहीं होती !  परिणाम यह होता है कि कोई भी लक्ष्य पूरा नहीं हो पाता ! अतः एक बार मैं सिर्फ एक ही लक्ष्य बनाइए और अपनी पूरी ऊर्जा उसी पर केंद्रित कर दीजिए !

बहुत जल्द सकारात्मक परिणाम मिलेंगे आपको और वैसे भी हमारा दिमाग एक बार में सिर्फ एक काम करने के लिए बनाया गया है|


9. संतुलन का ध्यान रखें:  यहां में आपके लिए मशहूर लेखक चेतन भगत द्वारा Symbiosis में दी गई speech का एक अंश quote कर रहा हूं !

सिर्फ पढ़ाई और करियर संबंधी लक्ष्य पर्याप्त नहीं है जीवन को सफलतापूर्वक जीने और इसके सभी आयामों के बीच संतुलन स्थापित करने हेतु लक्ष्य चुनना आवश्यक है इसमें भी मैं संतुलन को सफलता से ऊँचा रखना चाहूंगा क्योंकि बिना संतुलन के सफलता बेमानी है संतुलन से मेरा अभिप्राय कार्य के अनुपात में स्वास्थ्य. रिश्ते-नाते, मानसिक शांति इत्यादि विविध आयामों को उचित महत्व दिए जाने से है !

आप ही बताइए कि क्या अपनी Wife या Girl Friend से संबंध विच्छेद या Breakup वाले दिन मिला Promotion आपके किसी काम का होगा ! या अपनी नई कार को चलाने का सुख आप ले पाएंगे, अगर पीठ दर्द के कारण आप ठीक से बैठ भी नहीं पा रहै हो ! अच्छी से अच्छी दुकान में जाकर भी आप शॉपिंग का आनंद नहीं उठा सकते अगर आपका दिमाग तनाव से भरा हुआ है !


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तो जिंदगी नर्सरी स्कूल मैं अकेली जाने वाली उस दौड़ के जैसी है जिसमें हमें मुंह में एक चम्मच दबाकर दौड़ना होता है और उस चम्मच में एक कंचा रखा होता है इधर कंचा गिरा उधर आप दौड़ से बाहर ! जिंदगी की दौड़ में स्वास्थ्य और रिश्ते नाते चम्मच में रखे हुए कंचे जैसे है, सफलता की चाह तभी तक सार्थक होगी जब तक आपके जीवन में संतुलन है !अन्यथा आप सफलता तो पा जाएंगे किंतु यह ऊपरी होगी, भीतर से आपका रस सुखने लगेगा ! जीने की उमंग कम होने लगेगी और एक खालीपन महसूस होगा और इस स्थिति में आप सफलता को भी बरकरार नहीं रख पाएंगे |

10. आपातकालीन योजना तैयार रखें (Keep emergency plan) : आप चाहे जो करें जैसे करें उसमें अड़चने तो आएगी ही ! उनसे बचने का कोई उपाय नहीं ! किसी ने कहा भी है की गिरने की संभावना को समाप्त करने का एकमात्र उपाय यह है कि आप चलना ही छोड़ दें ! क्योंकि चलेंगे तो ठोकरें तो लगेगी ही ! अब यह आप पर निर्भर करता है कि आप उन  ठोकरों को किस तरह लेते हैं और किस तरह उनसे होने वाले नुकसान को न्यूनतम करके दोबारा चल पड़ते हैं ! बेहतर यही होगा कि आप संभावित अड़चनों को पहले से अनुमान लगाकर उनसे निपटने की योजना तैयार रखिए क्योंकि अगर आप बेख़बर रहेंगे, तो अचानक प्रकट होने वाली छोटी सी छोटी अड़चन भी आपको बड़ी आफ़त मालूम होगी !

और इसी दो चार आफ़त के बाद आप आगे बढ़ने से तौबा कर लेंगे ! इसलिए अपने दिमाग में बैठा लीजिए कि अड़चने तो आएगी ही आपको मानसिक रुप से इनके लिए तैयार रहना पड़ेगा, इन्हें स्वीकार ना पड़ेगा, और उनसे होने वाले नुकसान को रोकने या कम करने के लिए आपातकालीन  योजनाएं बनाकर रखना होगी, आसानी से कुछ भी हासिल नहीं होता मेरे दोस्त ! हीरे को भी हीरा बनाने के लिए भारी दबाव और झुलसा देने वाली  ताप से गुजरना पड़ता है !
समस्या छोटी बड़ी नहीं होती उनसे जूझने का हमारा जज्बा कम या ज्यादा हो सकता है संकट काल में ही व्यक्ति के चरित्र की परीक्षा होती है जिस में व्यवधान ज्यादा हो उसी समय स्वयं को शांत, संयत और केंद्रित रखने की हमारी क्षमता भी बढ़ जानी ! चाहिए तूफान के बीच भी धैर्यपूर्वक आगे बढ़ते रहना ही विजेता की निशानी है !

11. स्वयं को जानते रहे: आपने लक्ष्य निर्धारित कर लिए, उनको प्राप्त करने के लिए कार्य योजना बना ली, उस समय पर अमल शुरू कर दिया, और राह में आने वाली अड़चनों से भी आप दो दो हाथ कर चुके! तो अब क्या?  अब समय आ गया है अपनी तरक्की को जांचने का थोड़ा रुक कर और पीछे मुड़कर देखने का की अब तक की हमारी यात्रा योजना अनुसार चली है अथवा नहीं ? कि हमने जो बीज बोए थे उनमें अंकुर फूटे हैं या नहीं ? कि हम निर्धारित मार्ग पर ही आगे बढ़े हैं या भटक गए हैं !

इस तरह से हमें अपनी कार्य योजना की सटीकता या कमियों का बोध हो जाता है अगर अब तक के प्रयासों से हमें अपेक्षित सफलता नहीं मिली हो, तो हम प्रयासों की दिशा बदल सकते हैं लेकिन इस Review के परिणाम से नया तो हमें आत्म-मुग्ध हो जाना है और न ही निराश होकर दिल छोटा करना है ! अगर हमारी प्रगति संतोषजनक है तो आगे भी हमें इसी स्तर को बनाए रखना होगा, और अगर कमियां मालूम हो रही है तो उनमें सुधार कर आगे बढ़ जाना है ! खोया तो आपने कुछ है ही नहीं ! आपने तो बस यह जाना है कि वह कौन से तरीके है जिनसे अपने लक्ष्य तक नहीं पहुंचा जा सकता ! यह जानना अपने आप में एक बड़ी सफलता है !

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12. गुरु बिन ज्ञान न होई: कहते हैं कि बिना गुरु के ज्ञान नहीं मिलता !अब यह क्या बात हुई भला ! मेहनत करना है आपको, सपने देखना है आपको, तो फिर भला गुरु कहां से बीच में आ गया ? आता है ! गुरु या मार्गदर्शक वह होता है जो उस मंजिल पर पहुंच चुका है जिसके लिए आप निकले हैं ! अतः वह रास्ते के हर एक पत्थर को पहचानता है हर मोड़ की उसे खबर होती है वह आपको ऐसी बेजा गलतियों से बचाता है जो आप को हमेशा के लिए दौड़ से बाहर कर सकती है !

दूसरी बात यह है कि उसके लिए आप की खूबियां और खामियां देखना आसान होता है स्वयं का पोस्टमार्टम आसान नहीं होता अतः आपको रास आने वाली कार्य योजना बनाने में सहायक होता है कुल मिलाकर यह कि गुरु की सहायता वरदान होती है ! और यह वरदान किस्मत वालों को ही हासिल होता है अतः यदि आप  बिजनेसमैन, वैज्ञानिक, गायक, नर्तक बनना चाहते हो तो एक गुरु की तलाश अवश्य करें !

13. प्रार्थना और ध्यान के लिए विज्ञान को समझें :  हर रात सोने से पहले अपने लक्ष्यों का स्मरण करना, आदत में शामिल कर लीजिए अपने सारे काम निपटा कर सारी व्यवस्थाओं को छोड़ कर शांत मन से शरीर को तनाव रहित करके बैठे ! और बंद आंखों से उस स्थिति की कल्पना करें जब कि आपका लक्ष्य हासिल हो गया हैं ! आप ख़ुशी से सरोबार है, और आपका हृदय अस्तित्व के प्रति कृतज्ञता से भर उठा है, इस स्थिति में अपने दोनों हाथ उठाकर कहिए, शुक्रिया बहुत बहुत शुक्रिया ! मैं इस नेमत को पाकर बहुत खुश हूं ! हृदय से महसूस की गई संतुष्टि और कृतज्ञता चमत्कार कैसा असर दिखाती है और आपको आपका लक्ष्य पाना बेहद आसान हो जाता है ! अब तो वैज्ञानिक भी इस तरह की  प्रार्थनाओ के असर को स्वीकार करने लगे हैं !

जो छोटा सा बिजली का बल्ब आपके घर में लटका हुआ है ना उस का आविष्कार इतना आसान नहीं था, हजारों हजार असफल प्रयोगों के बाद कहीं जाकर थॉमस एलवा एडिसन सर इसे बना पाए थे ! एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब इन्हीं असफलताओं के बारे में पूछा गया तो एडिसन बड़ी मासूमियत से बोले थे, कैसी असफलताएं ? मैंने तो  ऐसे हजार तरीकों की खोज की थी, जिनसे बल्ब नहीं बनाया जा सकता !

आगे चलकर यही एडिशन दुनिया के इकलौते ऐसे वैज्ञानिक बने, जिनके नाम 900 से अधिक पेटेंट दर्ज हुए ! सोचिए क्या होता, अगर वह शुरुआती कुछ  प्रयासों के बाद ही हार मान कर बैठ गए होते लेकिन ऐसा हुआ नहीं, क्यों ?  क्योंकि उनके भीतर अपने लक्ष्य को पाने की तीव्र बेकरारी थी !उनकी महत्वकांक्षा उन्हें चुपचाप नहीं बैठने देती थी, सफलता की राह में आने वाली बाधाओं को उन्होंने सफलता तक जाने वाली सीढ़ियां बना लिया था ! उनके लिए उनका काम काम नहीं बल्कि जीने का मकसद था आनंद करने का माध्यम था |

दोस्तों आपको ये पोस्ट कैसा लगा अपने कमेंट देकर जरूर बताये ! मुझे पता है Post थोड़ा लंबा हो गया लेकिन फिर भी कम शब्दो में ज्यादा लिखने की कोशिश की है उम्मीद है आपको ये पोस्ट पसंद आएगा !


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