सागर की लहरों पर

Short-Hindi-Story

सर, अगले महीने 10 दिन की छुट्टी मिल जायेगी क्या? ग्रीस और तेल में सने हुए हाँथ लिए पवन ने अपने सीनियर से पूछा। 

सीनियर के जवाब का इन्तजार किये बिना वापस अपने काम में लग गया। सीनियर ने आगामी महीने में विभाग के हजार काम गिनाकर न केवल लगभग मना कर दिया बल्कि उसे फटकार भी लगाई। 

"हमेशा अपने बारे में सोचता रहता है, काम तो कुछ करना है नही बस छुट्टी टाइम पर चाहिए।" "बात करता हूँ मैं फिर भी" ये कहकर सीनियर चला गया और पवन, जिसने अगले महीने छुट्टी का प्रोग्राम बनाकर जो ख्याली चित्र अपने मानसपटल पर अंकित किये थे, मिटाने लग गया।

दिमाग हजारों सवालों से घिरा सागर की लहरों से हिलोरें मारता रहा.. माँ बीमार है, पापा बूढ़े हो चुके हैं आजकल तो दिन भर काम इतना रहता है कि फोन करना लगभग नामुमकिन है.. कोई दो सप्ताह से घर बात नही कर पाया था वो। 

ऑफिस बंद होते होते रात के 11 बज जाते हैं ऐसे में घर वालों को सोने से जगाना भी तो ठीक नहीं, आह! वो करे तो क्या करे। पिछली बार फोन पर माँ ने उलाहना दिया था कि बेटा तू तो भूल ही गया, आजकल न तेरे फोन आते हैं न ही तू आया कई महीने गुजर गए। और वो चुप चाप सब सुन लेता, 

उसे हकीकत पता थी या फिर स्वयं ईश्वर जानता था कि उस हंसमुख मस्तमौला पवन के पीछे एक सहृदय कोमल मन का इंसान छिपा हुआ है, जो रोज देर रात अपना गिरेबान आंसुओं से भिगोता है, लेकिन क्या मजाल किसी को मालुम चल जाए।


मानसिक अंतर्द्वंद बढ़ता जा रहा था लेकिन इसका कोई हल नही था.. हर बार की तरह उसे इस बार भी छुट्टी के लिए निराश होना पड़ा। कई अपनों से वादे किये थे.. 

अब शिकायतें सुनने के लिए भी तैयार था पवन। उसे अब ये पता चल चुका था कि वो अब इसी के लिए बना है.. ये समाज और दुनिया केवल परोक्ष रूप से ही उसकी अपनी रह गयी है उसका अपना है अपना वतन अपना देश जिसे वो सागर की लहरों में महसूस करता है तो कभी समंदर की तेज हवाओ में। 

उसका समर्पण जिसने उसका अल्हड़पन छीन लिया उसी ने पवन को दिया एक नाम एक पहचान जो उसे कई तमाम लोगों से अलग खड़ा करती है और वो मुस्कराता रहता है। उसकी मुस्कान किसी भी अवसाद का संहार करने में सक्षम है..


जीना सीख गया था पवन या ये कहिये कि पवन ने अब जीवन का मतलब और मकसद हासिल कर लिया था उसे विश्वास था कि उसके अपने समझेंगे उसकी समस्या और क्षमा कर देंगे उसे लेकिन यदि अपनी जरूरत के समय वो अपने देश के साथ खड़ा न हो पाया तो खुद को कभी माफ़ नही कर पायेगा यही सोच ही रहा था पवन कि एक लहर आहिस्ता आकर उसे चूमकर चली गयी मानो समंदर उसकी पीठ थपथपाकर शाबाशी दे रहा हो।

Story By: आदर्श सिंह "निखिल
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1 comments:

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12 October, 2016 ×

acchi post !
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Congrats bro Ashutosh Dubey you got PERTAMAX...! hehehehe...
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